📚 Issue VII | Year III · December 2026 · pp. 1-6

हिंदी साहित्य के मनोवैज्ञानिक उपन्यास : एक अध्ययन

हन
हिमांशु नागदा
शोधार्थी (हिन्दी)
डव
डॉ विजयलक्ष्मी पोद्दार
तुलनात्मक भाषा एवं संस्कृति अध्ययनशाला
Hindi

Abstract

Hindi

हिन्दी उपन्यासों में मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति का विकास प्रेमचन्द युग एवं प्रेमचन्दोत्तर युग की एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। जहाँ प्रेमचन्द ने निर्मला, गबन और गोदान में सामाजिक यथार्थ के साथ पात्रों की मानसिकता को उभारा, वहीं जैनेन्द्र ने परख, त्यागपत्र आदि में व्यक्ति के अंतर्मन की हलचलों को केन्द्र में लाकर मनोवैज्ञानिक उपन्यास को एक विशिष्ट दिशा दी। हिंदी के मनोवैज्ञानिक साहित्यकारों में फ्रायड, युंग तथा एडलर जैसे विचारकों के प्रभाव तथा मध्यवर्गीय जीवन की विडम्बनाओं ने इस प्रवृत्ति को और सुदृढ़ किया। इलाचन्द्र जोशी, अज्ञेय, श्रीकान्त वर्मा, गिरिराज किशोर, धर्मवीर भारती, मोहन राकेश और निर्मल वर्मा इत्यादि जैसे उपन्यासकारों ने अपने साहित्य में कुण्ठा, तनाव, आत्महीनता और अवचेतन की जटिलताओं को उकेरकर इस परम्परा को व्यापक आयाम प्रदान किए। इसी धारा में महिला उपन्यासकारों जैसे कृष्णा सोबती, मन्नू भंडारी, मृदुला गर्ग, चित्रा मुद्गल आदि ने नारी मनोविज्ञान को नए सन्दर्भ प्रदान किए। इक्कीसवीं सदी में मनीषा कुलश्रेष्ठ के स्वप्नपाश ने इस मनोवैज्ञानिक परम्परा को समकालीन संवेदना के साथ आगे बढ़ाया।

Keywords

मनोविज्ञान उपन्यास प्रेमचन्द निर्मला गबन गोदान सामाजिक यथार्थ हिंदी इलाचन्द्र जोशी अज्ञेय श्रीकान्त वर्मा गिरिराज किशोर धर्मवीर भारती मोहन राकेश ।

Paper Details

Issue
Issue VII | Year III
Published
December 2026
Pages
pp. 1-6
Language
Hindi
ISSN
3048-6319 (Online)
Publisher
Baraudi Sanskriti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti

How to Cite

हिमांशु नागदा, डॉ विजयलक्ष्मी पोद्दार. "हिंदी साहित्य के मनोवैज्ञानिक उपन्यास : एक अध्ययन." Bundelkhand Vimarsh, Issue VII | Year III (December 2026), pp. 1-6. ISSN: 3048-6319.