📚 Issue VIII | Year IV · April 2026 · pp. 1-9

भारतीय ज्ञान परम्परा के परिप्रेक्ष्य में सतत शैक्षिक विकास की सैद्धान्तिक रूपरेखा

PN
Prof. Nilabh Tiwari
Central Sanskrit University
Hindi

Abstract

Hindi

समकालीन वैश्विक अकादमिक विमर्श में सतत विकास (Sustainable Development) और शिक्षाशास्त्र के मध्य अंतर्संबंध एक केंद्रीय विषय बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-4 (SDG-4) ने समावेशी शिक्षा और आजीवन अधिगम को सार्वभौमिक प्राथमिकता दी है । तथापि, विकास की वर्तमान वैश्विक संकल्पना मात्र यांत्रिक वृद्धि, भौतिक समृद्धि और लौकिक प्रतिष्ठा तक सिमट गई है, जिसके परिणामस्वरूप मानवीय संवेदनाओं का क्षरण हुआ है । यह शोधपत्र भारतीय ज्ञान परम्परा के तात्विक और दार्शनिक आधारों का उपयोग करते हुए सतत शैक्षिक विकास की एक नवोन्मेषी सैद्धान्तिक रूपरेखा प्रस्तुत करता है। अध्ययन उद्घाटित करता है कि भारतीय दृष्टि में विकास एकरेखीय (Linear) न होकर चक्रीय (Cyclical) और अंतःकरण से उद्भूत होने वाली प्रक्रिया है । तैत्तिरीयोपनिषद् के 'पंचकोश सिद्धांत' और विविध वैदिक सूक्तियों के विश्लेषणात्मक मूल्यांकन के माध्यम से, यह शोध समग्र व्यक्तित्व विकास का एक ऐसा 'आश्रम-आधारित' प्रतिमान प्रस्तुत करता है , जो आधुनिक शैक्षिक एवं पारिस्थितिक चुनौतियों का समाधान करने में पूर्णतः सक्षम है।
मुख्य शब्द (Keywords): सतत

Keywords

सतत शैक्षिक विकास ज्ञानमीमांसा पंचकोश सिद्धांत आजीवन अधिगम चक्रीय विकास SDG-4.

Paper Details

Issue
Issue VIII | Year IV
Published
April 2026
Pages
pp. 1-9
Language
Hindi
ISSN
3048-6319 (Online)
Publisher
Baraudi Sanskriti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti

How to Cite

Prof. Nilabh Tiwari. "भारतीय ज्ञान परम्परा के परिप्रेक्ष्य में सतत शैक्षिक विकास की सैद्धान्तिक रूपरेखा." Bundelkhand Vimarsh, Issue VIII | Year IV (April 2026), pp. 1-9. ISSN: 3048-6319.