📚 Issue VII | Year III · December 2026 · pp. 1-7

महाकाल लोक में प्रतिमा निर्माण के वास्तुशास्त्रीय सन्दर्भ

दश
दर्शना शर्मा
शोधार्थी महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय उज्जैन (म.प्र.)
डउ
डॉ. उपेन्द्र भार्गव
असिस्टेन्ट प्रोफेसर महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय उज्जैन (म.प्र.)
Hindi

Abstract

Hindi

भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अभिन्न अंग वास्तुशास्त्र है जिसमें मानव जीवन के लिए परम उपयोगी आवासीय सिद्धान्तों का स्वतन्त्र प्रतिपादन किया गया है। इसमें आवासीय वास्तु तथा देवालय वास्तु प्रमुख भाग हैं। देवालय वास्तु के अंतर्गत् प्रतिमा निर्माण का विशेष वर्णन किया जाता है जिसमें देवप्रतिमाओं के निर्माण, मापन, पदार्थ चयन, स्वरूप, अलंकरण, मुद्रा, प्राण प्रतिष्ठा तथा स्थापना विधान का विस्तृत निरूपण प्राप्त होता है। भारतीय परम्परा में प्रतिमा कला का सशक्त माध्यम है तथा वह आध्यात्मिक चेतना व दिव्यता की प्रतीक मानी गई है। वैदिक काल में जहाँ निराकार उपासना का प्राधान्य था वहीं पुराण एवं आगम परम्परा में सगुण उपासना के विकास के साथ प्रतिमा निर्माण विज्ञान का भी उत्कर्ष हुआ। प्रस्तुत शोधपत्र में शिला, काष्ठ एवं धातु निर्मित प्रतिमाओं के निर्माण विधान का विवेचन किया गया है। साथ ही महाकाल लोक, जगन्नाथ पुरी तथा पद्मनाभस्वामी मंदिर आदि के उदाहरणों द्वारा प्रतिमा निर्माण की व्यावहारिक एवं सांस्कृतिक परम्पराओं का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। प्रस्तुत शोधपत्र से स्पष्ट है कि प्रतिमा निर्माण विज्ञान भारतीय

Keywords

प्रतिमा निर्माण विज्ञान वास्तुशास्त्र शिल्पशास्त्र देवप्रतिमा प्राण-प्रतिष्ठा मयमतम् बृहत्संहिता महाकाल लोक भारतीय ज्ञान परम्परा मूर्तिकला ।

Paper Details

Issue
Issue VII | Year III
Published
December 2026
Pages
pp. 1-7
Language
Hindi
ISSN
3048-6319 (Online)
Publisher
Baraudi Sanskriti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti

How to Cite

दर्शना शर्मा, डॉ. उपेन्द्र भार्गव. "महाकाल लोक में प्रतिमा निर्माण के वास्तुशास्त्रीय सन्दर्भ." Bundelkhand Vimarsh, Issue VII | Year III (December 2026), pp. 1-7. ISSN: 3048-6319.