महाकाल लोक में प्रतिमा निर्माण के वास्तुशास्त्रीय सन्दर्भ
Abstract
Hindiभारतीय ज्योतिष शास्त्र का अभिन्न अंग वास्तुशास्त्र है जिसमें मानव जीवन के लिए परम उपयोगी आवासीय सिद्धान्तों का स्वतन्त्र प्रतिपादन किया गया है। इसमें आवासीय वास्तु तथा देवालय वास्तु प्रमुख भाग हैं। देवालय वास्तु के अंतर्गत् प्रतिमा निर्माण का विशेष वर्णन किया जाता है जिसमें देवप्रतिमाओं के निर्माण, मापन, पदार्थ चयन, स्वरूप, अलंकरण, मुद्रा, प्राण प्रतिष्ठा तथा स्थापना विधान का विस्तृत निरूपण प्राप्त होता है। भारतीय परम्परा में प्रतिमा कला का सशक्त माध्यम है तथा वह आध्यात्मिक चेतना व दिव्यता की प्रतीक मानी गई है। वैदिक काल में जहाँ निराकार उपासना का प्राधान्य था वहीं पुराण एवं आगम परम्परा में सगुण उपासना के विकास के साथ प्रतिमा निर्माण विज्ञान का भी उत्कर्ष हुआ। प्रस्तुत शोधपत्र में शिला, काष्ठ एवं धातु निर्मित प्रतिमाओं के निर्माण विधान का विवेचन किया गया है। साथ ही महाकाल लोक, जगन्नाथ पुरी तथा पद्मनाभस्वामी मंदिर आदि के उदाहरणों द्वारा प्रतिमा निर्माण की व्यावहारिक एवं सांस्कृतिक परम्पराओं का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। प्रस्तुत शोधपत्र से स्पष्ट है कि प्रतिमा निर्माण विज्ञान भारतीय
