📚 Issue IV | Year II · December 2024 · pp. 06 - 11

सृष्टि के प्रकाश पुंज : अंधेरे के आलोक पुत्र

गग
गौरव गौतम
Hindi

Abstract

Hindi

किसी परिवार की उन्नति उसकी संतति पर निर्भर करती है। इसी तरह कोई समाज, कोई देश कितनी प्रगति करेगा यह उस समाज के व्यक्ति और देश के नागरिकों पर निर्भर करता है कि वह प्राप्त परम्परा का वरण कर उसे परिष्कृत करते हुए परिवर्धित करते है या प्राप्त हुई सम्पति को क्षरित होने देते है। नर्मदा प्रसाद उपाध्याय ने अपने ललित निबंधों के संग्रह 'अंधेरे के आलोक पुत्र' में ऐसे व्यक्तियों का वर्णन किया है जो अपने परिश्रम, तप और पुरुषार्थ से व्यक्तित्व बन गए। जिन्होंने जीते जी तो समाज की कुरीतियों, जड़ता और मूढ़ता से अलग कर बहुजन को न केवल बाहरी बल्कि भीतरी तौर पर इतना सशक्त बनाया कि कोई भी लालच, भय और प्रलोभन उन्हें सन्मार्ग के मार्ग से डिगा नहीं सकता। उनके भू लोक से जाने के बाद भी लोग उनसे प्रेरणा लेकर अपने पथ को प्रशस्त कर रहे है।

Keywords

कुरीतियों पुरुषार्थ अंधेरे प्रकाश प्रभोलन संस्कारवान भेदभावरहित ।

Paper Details

Issue
Issue IV | Year II
Published
December 2024
Pages
pp. 06 - 11
Language
Hindi
ISSN
3048-6319 (Online)
Publisher
Baraudi Sanskriti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti

How to Cite

गौरव गौतम. "सृष्टि के प्रकाश पुंज : अंधेरे के आलोक पुत्र." Bundelkhand Vimarsh, Issue IV | Year II (December 2024), pp. 06 - 11. ISSN: 3048-6319.