उर्वशी : एक मूल्यांकनपरक अध्ययन
Abstract
Hindiसाहित्य युगीन परिस्थितियों की वाहक होती है। साहित्य और युग परिवेश के बीच साहित्यकार की कला सेतु निर्माण करती है। आधुनिक हिन्दी साहित्य के युग प्रर्वतक साहित्यकार रामधारी सिंह दिनकर ऐसे साहित्यकार हैं जिन्होंने साहित्य की लगभग प्रत्येक विधा में समान भाव से लेखनी चलाई है। दिनकरजी आलोचक, कहानीकार, निबंधकार के साथ-साथ एक महान कवि भी हैं। ’उर्वशी’ दिनकरजी की सर्वश्रेष्ठ कृति है। यह एक प्रेमाख्यानक खंडकाव्य है, जिसमें मानव और दिव्यप्रेम, शरीर और आत्मा, संस्कार और स्वच्छंदता के द्वन्द्व को अत्यंत गहराई से प्रस्तुत किया गया है। उर्वशी-पुरुरवा प्रेम कथा का वर्णन सर्वप्रथम ऋगवेद में मिलता है। ’उर्वशी’ का कथानक एक पौराणिक कथा पर आधारित है जिसमें स्वर्ग की अप्सरा उर्वशी और पृथ्वी के राजा पुरुरवा के प्रेम सम्बन्धों को मनोवैज्ञानिक बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। ’उर्वशी’ में नारी के तीन प्रमुख रूपों और उनकी समस्याओं का निरूपण मिलता है--प्रेयसी, पत्नी और माता। ’उर्वशी’ खंडकाव्य में सौन्दर्य के मुख्यतः चार रूप मिलते हैं-- मानवीय सौन्दर्य, प्राकृतिक सौन्दर्य,
