📚 Issue VI | Year III · August 2025 · pp. 70–76

वास्तुशास्त्र में प्रतिमालक्षण

आद
आकाश दीप
शोध छात्र
Hindi

Abstract

Hindi

वास्तुशास्त्र भारतीय सभ्यता की एक प्राचीन विद्या है, जिसका उद्देश्य मानव जीवन को प्राकृतिक और आध्यात्मिक शक्तियों के साथ सामंजस्य में लाना है। यह विद्या न केवल भवन निर्माण के सिद्धांतों पर आधारित है, बल्कि इसमें प्रतिमा निर्माण, देवालय योजना और मूर्तियों के स्थापना से सम्बंधित गहन नियमों का भी समावेश है। प्रतिमालक्षणम् वास्तुशास्त्र का एक महत्वपूर्ण अंग है, जिसमें प्रतिमा निर्माण के विशेष मापदंडों और नियमों का वर्णन मिलता है। यह नियम प्रतिमा के विभिन्न अंगों के अनुपात, उसकी मुद्रा, सामग्री और उसकी स्थापना की दिशा से सम्बंधित होते हैं। प्राचीन ग्रंथों जैसे कि "मयमतम्", "मानसार", "समरांगणसूत्रधार" और "कौशिकसूत्र" में प्रतिमा निर्माण के सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन मिलता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, प्रतिमा का निर्माण पूर्णतः सटीक और संतुलित होना चाहिए, ताकि वह धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से फलप्रद हो सके।

Keywords

वास्तुशास्त्र भारतीय सभ्यता प्राचीन विद्या प्राकृतिक आध्यात्मिक. भवन प्रतिमा देवालय प्रतिमालक्षणम् वास्तुशास्त्र मयमतम् मानसार समरांगणसूत्रधार कौशिकसूत्र।

Paper Details

Issue
Issue VI | Year III
Published
August 2025
Pages
pp. 70–76
Language
Hindi
ISSN
3048-6319 (Online)
Publisher
Baraudi Sanskriti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti

How to Cite

आकाश दीप. "वास्तुशास्त्र में प्रतिमालक्षण." Bundelkhand Vimarsh, Issue VI | Year III (August 2025), pp. 70–76. ISSN: 3048-6319.