स्वर्गीय पण्डित श्री उमाशंकर भार्गव जी समिति के प्रथम संस्थापक सचिव थे तथा कालान्तर में अध्यक्ष भी रहे। वे एक कृषक थे तथा हिन्दी एवं बुन्देली में अपनी कवितायें लिखते थे जिस कारण कवि समवाय में उन्हें “कवि उमंग”नाम से ख्याति प्राप्त थी। उनकी रचनाएँ पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुयीं हैं तथा “उमंग प्रवाह” शीर्षक से समिति ने उनकी रचनाओं का संग्रह भी प्रकाशित किया है। कृषक के रूप में उन्हें विशेषज्ञता प्राप्त थी तथा उन्होंने कृषि क्षेत्र में भी अभिनव एवं अनूठे प्रयोग किये थे। कृषि में उनके द्वारा प्रयोग की जा रही आधुनिक देशी उन्नत तकनीकि, जैविक खेती, पर्यावरण एवं जल संरक्षण आदि की सफलता से प्रभावित होकर उनकी प्रगतिशीलता के लिए 19 अगस्त, 2012 को राजमाता विजयाराजे कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के तत्कालीन किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डॉ. राम कृष्ण कुसमारिया द्वारा सम्मानित किया गया। यह समाचार National Innovations on Climate Resilient Agriculture (NICRA) के अगस्त 2012 के Monthly e-Newsletter on Climate Resilient Agriculture के NICRA News के August 2012 अंक में प्रकाशित भी किया गया था। इसका सामाजिक प्रभाव यह हुआ कि स्थानीय अन्य कृषक मित्र भी जैविक खेती की ओर अग्रसर हुये। सन् 2017 में अकस्मात् उनका देहावसान हो गया जिससे संगठन (समिति) की आपूरणीय क्षति हुयी है
उनकी रचनाएँ पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुयीं हैं तथा “उमंग प्रवाह” शीर्षक से समिति ने उनकी रचनाओं का संग्रह भी प्रकाशित किया है। कृषक के रूप में उन्हें विशेषज्ञता प्राप्त थी तथा उन्होंने कृषि क्षेत्र में अभिनव एवं अनूठे प्रयोग किये थे।
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