‘संस्कृति संस्कृत संस्कार शिक्षा समिति’ एक पञ्जीकृत गैर लाभकारी अशासकीय संगठन (समिति) है, जो कि मध्य प्रदेश के ग्राम बरौदी, जिला दतिया, में सन् 2003 से सक्रिय रूप से कार्यरत है। समिति की स्थापना भारतीय ज्ञान परम्परा (Indian Knowledge System) में निहित शैक्षणिक एवं अकादमिक उद्देश्यों को पूर्ण करने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, संस्कार, सभ्यता, नैतिकता, वैदिक ज्ञान-विज्ञान, उपनिषद् एवं ऋषियों की महनीय परम्परा के शिक्षण तथा उन्हें संरक्षित करने के लिए की गयी है। भारतीय शिक्षा एवं ज्ञान प्रणाली तथा संस्कृत भाषा का पुनरुज्जीवन, संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार करना ही हमारा (समिति) का मुख्य लक्ष्य है। इसके साथ ही हम ग्रामीण, नगरीय सामाजिक क्षेत्र के सेवा प्रकल्पों, प्रकृति, पर्यावरण, जल एवं वन संरक्षण तथा समतुल्य महत्व के अन्य क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।
हमारे प्रथम संस्थापक स्वर्गीय पण्डित श्री रघुनन्दन प्रसाद भार्गव जी हैं, उनकी अध्यक्षता में दिनांक 15 मार्च 2003 को समिति की स्थापना का संकल्प लिया गया तथा सहायक पंजीयक फर्म एवं संस्थाएं क्षेत्रीय कार्यालय ग्वालियर में “मध्यप्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 (सन् 1973 का क्रमांक 44)” के अधीन दिनांक 31 मार्च 2003 को “बरौदी संस्कृति संस्कृत संस्कार शिक्षा समिति” के नाम से समिति का पंजीयन हुआ। दिनाँक 1 अप्रैल 2003 को प्रथम साधारण सभा का आयोजन किया गया जिसमें समस्त संस्थापक सदस्यों की उपस्थिति में विधिवत् समिति का शुभारम्भ किया गया। समिति का प्रधान कार्यालय “संस्कृतकुटीरम्” ग्राम बरौदी (बगीचा) नामक स्थान पर है जो कि जिला दतिया से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है। समीपस्थ रेलवे स्टेशन दतिया एवं झाँसी हैं तथा झाँसी-कोटा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 76, पर स्थित दिनारा से समिति मुख्यालय तक पहुँचने के लिए पक्के मार्ग की सुविधा उपलब्ध है।
संस्थापक
सह-संस्थापक
अध्यक्ष
उपाध्यक्ष
सचिव
कोषाध्यक्ष
संयुक्त सचिव
सदस्य
सदस्य