📚 Issue VIII | Year IV · April 2026 · pp. 1-12

पातञ्जल योगदर्शन में समाधि की अवधारणा : एक दृष्टि

DP
Dr Pushpinder joshi
Punjabi University Patiala
DR
Dr. Radha Devi
Punjabi University Patiala
Hindi

Abstract

Hindi

शोध-सारांश
भारतीय दर्शन भारतीय उपमहाद्वीप की सभ्यताओं द्वारा विकसित विचार और चिन्तन की प्रणालियां हैं। इन्हें वेदों की प्रमाणिकता के आधार पर आस्तिक (सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, पूर्व मीमांसा, उत्तर मीमांसा) और नास्तिक (बौद्ध, जैन, चार्वाक) दो वर्गों में विभाजित किया गया है जो व्यवहारिक और आध्यात्मिक ज्ञान पर विशेष ध्यान आकृष्ट करता है। जहां सांख्य में पुरुष और प्रकृति, योग में चित्तवृत्ति निरोध के लिए अष्टांगयोग, न्याय में तर्क और प्रमाण, वैशेषिक में परमाणुवाद, पूर्व मीमांसा में वैदिक कर्मकाण्ड और उत्तर मीमांसा अर्थात् वेदान्त में ब्रह्म - आत्मा की एकता आदि विषयों का प्रतिपादन किया गया । वहीं पर बौद्ध दर्शन में चार आर्य सत्य और अष्टांग मार्ग, जैन में अहिंसा और स्याद्वाद, चार्वाक में भौतिकता का निरूपण किया गया। भारतीय दर्शन में आत्मा, ब्रह्म, जगत, ज्ञान, नीतिशास्त्र, और सृष्टि के मूल तत्वों का गहन चिन्तन किया गया।
प्राय: सभी दर्शनों का परम लक्ष्य त्रिविध तापों से मुक्ति तथा मोक्ष प्राप्ति है जिसके लिए अनेकविध उपाय बताये गये है। योगदर्शन में भी अष्टांगयोग के माध्यम से ब्रह्म साक्षा

Keywords

योगदर्शन समाधि अष्टांग योग वृत्ति

Paper Details

Issue
Issue VIII | Year IV
Published
April 2026
Pages
pp. 1-12
Language
Hindi
ISSN
3048-6319 (Online)
Publisher
Baraudi Sanskriti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti

How to Cite

Dr Pushpinder joshi, Dr. Radha Devi. "पातञ्जल योगदर्शन में समाधि की अवधारणा : एक दृष्टि." Bundelkhand Vimarsh, Issue VIII | Year IV (April 2026), pp. 1-12. ISSN: 3048-6319.