📚 Issue II | Year I · April 2024 · pp. 1-9

बुंदेली भाषा की राजनीति : एक पड़ताल

कग
किसान गिरजाशंकर कुशवाहा
शोधार्थी - हिन्दी विभाग
अम
अर्चना मिश्रा
बुंदेलखंड़ महाविद्यालय
Hindi

Abstract

Hindi

बुंदेली भाषा बुंदेलखंड में बोली जाने वाली मुख्य भाषा है। इसे बुंदेलखंडी के नाम से भी जाना जाता है। बुंदेलखंड़ को हम लोग 'अखंड बुंदेलखंड' मानते हैं। बुंदेली का विकास अपभ्रंश भाषा से 10वीं सदी में हुआ। 12वीं सदी में जगनिक द्वारा रचित आल्हा चरित (परमाल रासो) को बुंदेली का पहला महाकाव्य और जगनिक को पहला कवि माना जाता है। बुंदेली की लगभग 25 बोलियाँ प्रचलित हैं। भाषा की राजनीति का एक अपना इतिहास है। भाषा की राजनीति सदियों से होती चली आ रही है। समकालीन वैश्विक, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय परिदृश्य को देखकर यही लगता है कि भाषा के नाम पर राजनीति सदियों तक होती भी रहेगी। बुंदेली भाषा की राजनीति करने करने वालों में स्थानीय नेता से लेकर राष्ट्रीय नेता समेत प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी भी शामिल हैं और इस भाषायी अस्मिता की लड़ाई और राजनीतिक चेतना में लेखक और पत्रकार मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। भाषा और संस्कृति के संरक्षण और विकास में राजनीति और सरकार का पुरातन काल से लेकर आज तक अहम योगदान रहा है इसलिए भाषा की राजनीति होती है। उसी क्रम में बुंदेली भाषा की राजनीति होती आ रही है और जब तक बुंदेली भाषा भ

Keywords

बुंदेली भाषा बुंदेलखंडी बुंदेलखंड़ अखंड़ बुंदेलखंड़ बुंदेली भाषा की राजनीति राजनीति बुंदेलखंड राज्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संविधान भारत विधान राजभाषा आठवीं अनुसूची।

Paper Details

Issue
Issue II | Year I
Published
April 2024
Pages
pp. 1-9
Language
Hindi
ISSN
3048-6319 (Online)
Publisher
Baraudi Sanskriti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti

How to Cite

किसान गिरजाशंकर कुशवाहा, अर्चना मिश्रा. "बुंदेली भाषा की राजनीति : एक पड़ताल." Bundelkhand Vimarsh, Issue II | Year I (April 2024), pp. 1-9. ISSN: 3048-6319.