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Issue II | Year I ·
April 2024 · pp. 1-11
सन 1857 की क्रांति में झाँसी की वीरांगनाओं का योगदान
Abstract
Hindiविश्व में बुंदेलखंड की भूमि 'कलम, कला, किसान और कृपाण की धरती' के नाम से पहचानी जाती रही है। जब हमारा भारत देश ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश सरकार का गुलाम हुआ तब इसी बुंदेलखंड की धरती से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ झाँसी की रानी वीरांगना लक्ष्मीबाई ने 'सुराज के लिए लड़िबो चहिए' की देशप्रेम की मानसिकता से राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्त्व किया। सन 1857 की क्रान्ति में झाँसी की वीरांगनाओं में झाँसी की रानी वीरांगना लक्ष्मीबाई, मोतीबाई, काशीबाई, सुंदर और मुंदर आदि का उल्लेखनीय योगदान रहा है।
Keywords
सन 1857 की क्रांति
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम
झाँसी
झाँसी की वीरांगना
झाँसी की रानी
महारानी लक्ष्मीबाई
बाईसा
नारी सेना
मोतीबाई
काशीबाई
सुंदर
मुंदर।
Paper Details
How to Cite
न डॉ. रमा आर्य. "सन 1857 की क्रांति में झाँसी की वीरांगनाओं का योगदान." Bundelkhand Vimarsh, Issue II | Year I (April 2024), pp. 1-11. ISSN: 3048-6319.
