📚 Issue VI | Year III · August 2025 · pp. 102–107

भारतीय पुस्तकालय व्यवस्था का विकास

शश
शुभम शर्मा
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय
Hindi

Abstract

Hindi

भारतीय पुस्तकालय व्यवस्था का विकास एक समृद्ध यात्रा है, जो प्राचीन भारतीय सभ्यता से आरंभ होकर आज के डिजिटल युग तक फैली हुई है। यह ज्ञान, संस्कृति और समाज के विकास का प्रतिबिंब है। भारत में पुस्तकालयों की परंपरा वेदों और उपनिषदों के समय से रही है। तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों में विशाल ग्रंथालय थे, जहाँ पांडुलिपियाँ ताड़पत्रों और भोजपत्रों पर संरक्षित की जाती थीं। आधुनिक पुस्तकालय प्रणाली इसी क्रम से विकसित हुई है । आधुनिक काल में अनेक सार्वजनिक पुस्तकालय, शैक्षणिक संस्थानों के पुस्तकालय और शासकीय पुस्तकालय स्थापित हुए। ब्रिटिश राज्य से स्वतंत्रता के पश्चात् 1954 में डेल्ही पब्लिक लाइब्रेरी की स्थापना यूनेस्को और भारत सरकार के सहयोग से हुई। पंचवर्षीय योजनाओं में पुस्तकालयों के विकास को प्राथमिकता दी गई। राज्य और जिला स्तर पर पुस्तकालय नेटवर्क का विस्तार हुआ। राज्य पुस्तकालय अधिनियमों के माध्यम से सार्वजनिक पुस्तकालयों को कानूनी मान्यता और वित्तीय सहायता मिली। आधुनिक युग में परिवर्तन सूचना प्रौद्योगिकी के आगमन से पुस्तकालयों का डिजिटलीकरण हुआ। ई-पुस्तकालय, ऑनलाइन ड

Keywords

भारतीय पुस्तकालय डिजियुग ज्ञान संस्कृति समाज पुस्तकालय वेद उपनिषद तक्षशिला नालंदा विक्रमशिला विश्वविद्यालय ग्रंथालय पांडुलिपियाँ ताड़पत्र।

Paper Details

Issue
Issue VI | Year III
Published
August 2025
Pages
pp. 102–107
Language
Hindi
ISSN
3048-6319 (Online)
Publisher
Baraudi Sanskriti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti

How to Cite

शुभम शर्मा. "भारतीय पुस्तकालय व्यवस्था का विकास." Bundelkhand Vimarsh, Issue VI | Year III (August 2025), pp. 102–107. ISSN: 3048-6319.