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Account Holder:Barodi Sansktiti Sanskrit Sanskar Shiksha Samiti
Account Number:7589001200000015
IFSC Code:PUNB0758900
Branch Name:Udgava (Datia)

संस्थापक

संस्कृत भाषा के उत्थान, शिक्षा के प्रसार एवं सामाजिक जागरण हेतु समिति की स्थापना के उद्देश्य का संकल्प लेने एवं उसको सिद्ध करने वाले समिति के संस्थापक अध्यक्ष परमपूज्य पण्डितप्रवर स्वर्गीय श्री रघुनन्दन प्रसाद शर्मा (भार्गव) जी हैं। परमपूज्य ने किशोरावस्था में वाराणसी में गुरुकुल पद्धति से संस्कृत की पारम्परिक शिक्षा ग्रहण की एवं गुरुमुख से शास्त्रों का विधिवत् अध्ययन सम्पादित किया। अध्ययन समाप्ति के उपरान्त उन्होंने पुलिस विभाग में अपनी सेवा आरम्भ की तथा सेवानिवृत्ति के पश्चात् भारतीय जीवनदर्शन एवं ऋषि परम्परा के संरक्षण तथा संवर्धन हेतु पूर्णतः समर्पित होकर कार्यारम्भ कर दिया। परम पूज्य ने सर्वप्रथम प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रयत्न आरंभ किए तथा परिवर्तन का आरंभ स्वयं से करते हुये स्वयं की कृषि भूमि पर लगभग तीन हजार से अधिक वृक्षों का रोपण किया। उनके इस महनीय कार्य की प्रसिद्धि शीघ्र ही सम्पूर्ण क्षेत्र में व्याप्त हो गयी इससे प्रेरित होकर अनेक कृषकों ने अपने कृषि क्षेत्र में वृक्षारोपण एवं बाग-बगीचे लगाना प्रारम्भ कर दिये। परमपूज्य ने अपने पौत्र को वेद, संस्कृत भाषा एवं शास्त्रों के अध्ययन हेतु प्रेरित किया जिसके फलस्वरूप समाज के अन्य लोगों ने भी अपने परिवार के एक एक बालक को वैदिक शिक्षा ग्रहण करने हेतु गुरुकुलों में भेज दिया। वे भारतीय मनीषा तथा ज्ञानमीमांसा के संवाहक, सामाजिक चिन्तन एवं धर्मशास्त्रों के पुरोधा, नीतिशास्त्र एवं न्याय के पक्षधर, लोकशास्त्र मर्मज्ञ, विचारक, चिन्तक, मनीषी, प्रकृतिप्रेमी, पर्यावरणरक्षक, समाज में व्याप्त कुरीतियों अन्धविश्वासों के प्रबल विरोधी तथा शिक्षा के विस्तारक थे। इसी कारण उन्होंने अपने परिश्रम एवं पुरुषार्थ से उपार्जित तथा अभिसिंचित बगीचे में ही समिति का कार्यालय संचालित करने हेतु स्थान प्रदान किया। सन् 2008 में उनके देवत्व में विलीन होने के उपरान्त उनके ज्येष्ठ पुत्र कविहृदय, उदात्त तथा विशाल व्यक्तित्व के धनी, मिलनसार करुणा एवं दया से परिपूर्ण समाजसेवक पण्डित श्री उमाशंकर शर्मा (भार्गव) जी ने उनके कार्यों को गति प्रदान की। वे समिति के प्रथम संस्थापक सचिव थे तथा कालान्तर में अध्यक्ष भी रहे। वे हिन्दी भाषा एवं बुन्देली में अपनी कवितायें लिखते थे जिस कारण कवि समवाय में उन्हें कवि (उमंग) के नाम से ख्याति प्राप्त हुयी। वे एक सफल कृषक थे, उनके द्वारा प्रयोग की जा रही जैविक खेती की सफलता से प्रभावित होकर मध्यप्रदेश शासन कृषि विभाग तथा कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर द्वारा उन्हें प्रादेशिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इससे सम्पूर्ण क्षेत्र के गौरव तथा सम्मान में वृद्धि हुयी एवं अन्य कृषक मित्र भी जैविक खेती की ओर अग्रसर हुये। सन् 2006 में अकस्मात् उनका देहावसान होने से समिति की आपूरणीय क्षति हुयी है। वर्तमान में उनके ज्येष्ठ पुत्र डॉ. उपेन्द्र भार्गव समिति के अध्यक्ष के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहण कर रहे हैं। .

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